होली का त्यौहार

                
                                                             
                            रंगों की बहार आ गई
                                                                     
                            
देखो फिर से
होली का त्यौहार आ गया
झूमेगें, गायेगें, नाचेंगे
फिर से एक बार
देखो रंगो की भरमार आ गई
क्या मदहोशी छा गई फ़िज़ाओं में
जैसे नशा घुल गई हो हवाओं में
पीकर मस्त हो रहे हैं सभी
ख़ुशियों के रंगो से सराबोर है सभी
मिलकर गले मना रहे है त्यौहार
दूरियों को आपस में मिटा रहे हैं यार
ना नफरते ना सरहदे हो
ना साम्प्रदायिकता की कोई दीवार
इस बार नये तरीके से
मनाये होली का त्यौहार
रंग लगे तन पर
और मिटे दिल से मैल
एक-दूसरे संग खाकर
हटाये जात-पात का भेद
धर्म के चक्कर को छोड़कर
पहले हम बने इंसान
इंसानियत का फ़र्ज़ अदा कर
फैलाये समाज में ख़ुशियां अपार
तब होली का मजा हो जायेगा दुगुना
जब मिलेगें दिल से दिल के तार



हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
1 year ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
X