माफ़ कर दो, गर माफ़ कर दो,
मेरी हर ख़ता को अपने दिल से साफ़ कर दो।
मेरी नादानियों को, मेरी गुस्ताख़ियों को,
मेरी छोटी-बड़ी हर शैतानी को माफ़ कर दो।
वो एक-दूसरे के राज़ खोल देना,
बिना सोचे किसी का दिल तोड़ देना।
आपसे ऊँची आवाज़ में बात कर जाना,
फिर अपनी बातों को सही ठहराना।
वो झूठी-सच्ची कहानियाँ बुन लेना,
आँखों में बनावटी आँसू भर लेना।
बात-बात पर यूँ रूठ जाना,
और बेवजह आपको सताना।
हर छोटी-छोटी चीज़ की फ़रमाइश करना,
अपनी चीज़ों की दूसरों से नुमाइश करना।
अपनी ज़िद में आपकी बात ठुकराना,
फिर ख़ुद ही अपनी गलती पर पछताना।
आज सिर झुकाकर बस यही दुआ करती हूँ,
अपने हर गुनाह की माफ़ी माँगती हूँ।
अगर मेरी किसी बात से आपका दिल दुखा हो,
तो अपनी मोहब्बत से हर शिकवा मिटा दो।
आपकी दुआओँ के बिना मैं अधूरी हूँ,
आपकी मुस्कान ही मेरी सबसे बड़ी ख़ुशी है।
मेरी हर भूल को अपने दिल से साफ़ कर दो,
मुझे, अम्मी… अल्लाह के लिए माफ़ कर दो।
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