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क्या लिखूँ

                
                                                         
                            क्या लिखूँ, क्या लिखूँ,
                                                                 
                            
क्या लिखूँ, क्या लिखूँ।

तू ही दिल, तू ही जाँ,
तू बता, क्या लिखूँ।

दिल में क्या था तेरे,
तू बता, तू बता।
लबों की इन ख़ामोशियों में,
मैं भला क्या लिखूँ।

ख़ामोशी भी लबों पर है,
तन्हाई भी चली आई है।
धड़कनों की इन राहों पर,
ये कैसी परछाई छाई है।
तेरी तन्हाई में,
तेरी यादों की गहराई में,
रूह की इन सिसकियों को,
मैं भला क्या लिखूँ।

तू ही दिल, तू ही जाँ,
तू बता, क्या लिखूँ।

मुस्कुरा दे अगर,
कलियाँ फिर खिल जाएँ।
जान भी दे दूँ अगर,
तेरी खुशियाँ मिल जाएँ।
मुस्कुराए तू अगर,
बस एक पल के लिए,
उस एक पल की ख़ातिर,
अपनी हर धड़कन रख दूँ।

तू ही दिल, तू ही जाँ,
तू बता, क्या लिखूँ।

क्या लिखूँ, क्या लिखूँ,
मेरी जाँ, तू बता—
मैं भला क्या लिखूँ।
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3 महीने पहले

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