आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

हर सुबह कुछ कहती है

                
                                                         
                            ज़िंदगी की उमंगें लेकर,
                                                                 
                            
हर साँस में खुशियाँ बहती हैं।
यहाँ हर सुबह कुछ कहती है,
हाँ, हर सुबह कुछ कहती है।

तारों की रौशनी समेट लाती,
चाँदनी की शीतलता संग लाती।
सूरज की सुनहरी किरणों में,
नई उम्मीदें मुस्काती रहती हैं।
यहाँ हर सुबह कुछ कहती है,
हाँ, हर सुबह कुछ कहती है।

जीवन में नई खुशियाँ भरकर,
हर ग़म को चुपचाप सहती है।
टूटे मन में फिर विश्वास जगाकर,
आशा की लौ सदा जलती है।
यहाँ हर सुबह कुछ कहती है,
हाँ, हर सुबह कुछ कहती है।

चलो उठें, सपनों को सच करें,
हर पल को मुस्कान से भरें।
नई राहों का संदेश लिए,
हर दिन नई कहानी कहती है।
यहाँ हर सुबह कुछ कहती है,
हाँ, हर सुबह कुछ कहती है।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर