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हर पल काम बहुत है

                
                                                         
                            हर पल काम बहुत है,
                                                                 
                            
दिल में अरमान बहुत है।
ज़िंदगी हर रोज़ कुछ नया सिखाती है,
फिर भी सीखने को जहान बहुत है।

गिरकर सँभलना ही ज़िंदगी का सफ़र है,
हर ठोकर में छिपा एक नया हुनर है।
कभी जीत, कभी हार का पैग़ाम बहुत है,
हर पल काम बहुत है,
दिल में अरमान बहुत है।

उड़ने की चाह है,
हर मोड़ पर नई राह है।
ज़िंदगी की इन अनजानी राहों में,
सीखने के इम्तिहान बहुत हैं।

हौसलों की लौ कभी बुझने न देना,
मुश्किलों से कभी डरकर न मुड़ना।
सपनों को सच करने का इरादा मज़बूत हो,
तो मंज़िलों के आसार बहुत हैं।

हर सुबह नई उम्मीद लेकर आती है,
हर शाम कोई अनुभव दे जाती है।
बस चलते रहो, मुस्कुराते रहो,
क्योंकि अभी मंज़िलें और मुकाम बहुत हैं।

हर पल काम बहुत है,
दिल में अरमान बहुत है।
ज़िंदगी की इस खूबसूरत राह में,
सपने भी बहुत हैं, और उड़ान भी बहुत है।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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