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एक ज़िंदगी नुक्कड़ पर गुब्बारे बेच रही है

                
                                                         
                            एक तरफ़ बिक गया है बचपन,
                                                                 
                            
एक तरफ़ हर उम्र की ख़ूबसूरत रेखा है।
एक ज़िंदगी नुक्कड़ पर गुब्बारे बेच रही है,
तो एक को गुब्बारे उड़ाते देखा है।

एक बच्चा खा रहा है बड़ी मुश्किल से
माँ के हाथ से निवाला।
एक ने उठाया वही निवाला,
जो किसी ने अपने घर से फेंका है।
एक ज़िंदगी नुक्कड़ पर गुब्बारे बेच रही है,
तो एक को गुब्बारे उड़ाते देखा है।

कुछ बच्चे सूट पहन मेले में खड़े थे,
वहीं कुछ दूर कुछ के कपड़े
सब ओर से फटे थे।
एक बच्चा जो जूते लेकर उस सड़क पर आया था,
एक बचपन जिसने वही जूता चमकाया था।
कहीं ज़िंदगी नवाबी में जी जा रही है,
कहीं हर पल इम्तिहान का झरोखा है।
एक ज़िंदगी नुक्कड़ पर गुब्बारे बेच रही है,
तो एक को गुब्बारे उड़ाते देखा है।

निगाहें तरस गईं कहीं
बूंद-बूंद की तलाश में,
कहीं बच्चों के हाथ में
समंदर देखा है।
एक ज़िंदगी नुक्कड़ पर गुब्बारे बेच रही है,
तो एक को गुब्बारे उड़ाते देखा है।
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3 महीने पहले

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