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हिंदनामा

                
                                                         
                            दक्षिण की धरती पर दो घर, एक ही नाव के सवार,
                                                                 
                            
राजनीति, संस्कृति, क्षेत्रीय भावों ने कर दिया उन्हें अलग इस बार।
एक को केंद्र की नई पहचान मिली, दूजे को सागर का किनारा,
अट्ठावन-बयालीस के अनुपात में बँटा संपत्तियों का सारा सहारा।

कुचिपुड़ी की अनुपम छवि, जिसकी गूँज जग में छाई है,
भारत का सबसे लंबा समुद्री तट भी इसकी शान बढ़ाई है।
तिरंगे की अमर रूपरेखा पिंगली वेंकैया ने यहीं सँवारी,
"भारत का धान का कटोरा" कहलाने की इसने गौरव-गाथा सँवारी।

दूसरे घर की पहचान है चारमीनार और गोलकुंडा महान,
काकतीय और कुतुबशाही राजवंशों से समृद्ध इसका सम्मान।
हैदराबादी बिरयानी और हलीम का स्वाद जग में निराला है,
बथुकम्मा, बोनालु और सम्मक्का–सरलम्मा जातरा का उत्सव मतवाला है।

मैसूर जिसका पुराना नाम, दक्षिण का गौरवशाली प्रदेश,
अरब सागर तक फैली सीमाएँ, समृद्धि का अनुपम परिवेश।
बेंगलुरु "भारत की सिलिकॉन वैली" के नाम से विख्यात,
तकनीक और सॉफ्टवेयर की दुनिया में इसका अद्भुत प्रभात।
कूर्ग की हरियाली "भारत का स्कॉटलैंड" कहलाती है,
मैसूर दशहरा की भव्यता विश्वभर में मुस्काती है।
जोग जलप्रपात की अनुपम धारा मन को हर लेती है,
प्रकृति और प्रगति मिलकर इसकी महिमा कहती है।

प्राचीन द्रविड़ संस्कृति का अनुपम, अमर यह धाम है,
तमिल भाषा की मधुर ध्वनि इसकी अनूठी पहचान है।
भरतनाट्यम की लय और कर्नाटक संगीत का मधुर स्वर,
इसके कण-कण में बसता भारत की संस्कृति का सुंदर घर।
कांचीपुरम की रेशमी साड़ियाँ जग में प्रसिद्ध महान,
इडली, डोसा, वड़ा, सांभर, वेन पोंगल इसकी पहचान।
ऑटोमोबाइल निर्माण में अग्रणी, "भारत का डेट्रॉइट" कहलाता है,
दिंडीगुल बिरयानी का स्वाद हर अतिथि को भाता है।

प्राकृतिक सौंदर्य से सजा, "ईश्वर का अपना देश" महान,
कथकली, मोहिनीयाट्टम और सेतु-मुंडु इसकी अनुपम शान।
कालीकट की धरती पर वास्को द गामा का प्रथम आगमन माना जाता है,
आयुर्वेद और स्पा चिकित्सा का विश्वव्यापी केंद्र कहलाता है।
सुगंधित मसालों से महकता, "भारत का मसाला उद्यान" है,
एशियाई हाथी, बाघ, सिंह-पूँछ मकाक और नीलगिरि तहर का सम्मान है।
बैकवाटर्स, हरियाली और नारियल की छाया मन मोह लेती है,
हर आने वाले यात्री के हृदय में अपनी छवि बसा देती है।

छुट्टियाँ बिताने देश-विदेश से हर वर्ष लोग यहाँ आते हैं,
समुद्री तट और सरल जीवनशैली सबके मन को भाते हैं।
कोलवा, बागा, कैंडोलिम की लहरें गीत सुनाती हैं,
पालोलेम और अगोंडा की शांत हवाएँ सुकून दिलाती हैं।
पुर्तगाली और भारतीय संस्कृति का अद्भुत संगम यहाँ मिलता है,
मौर्य, सातवाहन और कदंबों का इतिहास भी यहीं खिलता है।
भारत का सबसे छोटा राज्य, पर वैभव जिसका अपार है,
हर कुछ किलोमीटर पर नया समुद्री तट इसका श्रृंगार है।
असंख्य अतिथियों का स्वागत कर भी शांति यहाँ निवास करती है,
सोलहवीं शताब्दी में भारत की पहली मुद्रण-परंपरा यहीं विकसित होती है।
प्रकृति, इतिहास और संस्कृति का यह अनुपम उपहार है,
गोवा सचमुच भारत के गौरव का चमकता हुआ संसार है।
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3 महीने पहले

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