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अँधेरे में कोई है, जो अब भी जाग रहा है।

                
                                                         
                            रात के इस पहर में भी कोई है,
                                                                 
                            
जो बिना रुके भाग रहा है।
अँधेरे में कोई है,
जो अब भी जाग रहा है।

जब दुनिया सो जाती है,
वो अपने हथियार निकालता है।
इस गहरी नींद की खाई से
वो खुद को संभालता है।

दिखाकर अपना हुनर
उसने कई विरोधी मार दिए।
और ज़्यादा करने की होड़ में
दुश्मन के सर काट दिए।

अपना दृढ़ संकल्प लिए
भविष्य को वो नाप रहा है।
रात आधी हो गई है,
पर अब भी वो जाग रहा है।

अगर नींद का खुमार
उस पर छा जाएगा,
कोई और ये युद्ध की बाज़ी
मार जाएगा।

यहाँ होड़ में शिकारी
और भी खड़े हैं,
जो अपने दुश्मन से
हर रोज़ लड़े हैं।

हथियार में उनके
इतनी प्यास होती है,
चलते-चलते
उनकी ज़मीं आकाश होती है।

फिर भी थककर
वो हार नहीं मानते हैं,
हारे हुए दुश्मन को
फिर बार-बार मारते हैं।

रात के अँधेरे में
ये दृश्य बार-बार होता है।
कहाँ किसी आम का लक्ष्य
इतना ख़ास होता है।

वो एक मिनट की गिनती कर
दुश्मन को मार रहा है।
रात आधी हो गई है,
पर अब भी वो जाग रहा है।
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2 महीने पहले

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