मिल-जुलकर हम रहें सदा,
मन में हो बस प्रेम बड़ा।
न कोई ऊँचा, न कोई नीचा,
सबका जीवन सबसे मीठा।
हँसी बाँटें, खुशियाँ बाँटें,
दुख में मिलकर हाथ बढ़ाएँ।
भेदभाव को दूर भगाएँ,
प्रेम के दीप सदा जलाएँ।
जाति-धर्म का भेद न मानें,
सबको अपना सखा ही जानें।
एकता का गीत सुनाएँ,
समभाव से जग को सजाएँ।
सबका सम्मान, सबका मान,
यही बने अपना अभियान।
प्रेम, दया का दीप जलाएँ,
दुनिया में बने देश की शान।
-मोहन लाल रेगर
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