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और जाते-जाते जीवन भर के लिए

                
                                                         
                            सावन की एक शाम थी,
                                                                 
                            
आसमान भी उदास था,
बारिश की हर बूँद में
किसी बिछड़े का एहसास था।

हाथ में चाय थी,
खिड़की के बाहर बारिश थी,
और भीतर यादों की
एक लंबी-सी बारिश थी।

कितना अजीब है ना—
मौसम सबको खुश करता है,
पर किसी-किसी के लिए
सावन पुराने घाव भरता है।

फिर मन ने खुद से कहा—
यादों को बोझ न बनाना,
जो लौटकर नहीं आया,
उसे दुआओं में मुस्कुराना।

क्योंकि सावन का अर्थ
सिर्फ बरसना नहीं होता,
कभी-कभी भीगकर ही
मन हल्का होता है।

सावन की बारिश में
कुछ ऐसा असर होता है,
जो दिल से दूर हो जाए,
वही सबसे ज़्यादा याद आता है।

बूँदें जब खिड़की पर गिरती हैं,
मन चुपके से रो लेता है,
जिसे भुलाने की कोशिश हो,
सावन उसका नाम कह देता है।

भीगी हुई गलियों में
कुछ पदचिह्न पुराने मिलते हैं,
कभी जिनके साथ चले थे,
आज वही रास्ते अकेले मिलते हैं।

बादल तो हर साल बरसते हैं,
पर हर दिल कहाँ भीगता है,
जिसके भीतर कोई अपना हो,
सावन उसी को ज्यादा छूता है।

कुछ रिश्ते बारिश जैसे हैं—
आते हैं, मन भिगो जाते हैं,
और जाते-जाते जीवन भर के लिए
कुछ यादें छोड़ जाते हैं।
-मुनीर शमी
 
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42 मिनट पहले

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