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मेरी गली का चाँद

                
                                                         
                            गली में आज चाँद निकला, देखूँ मैं बार-बार,
                                                                 
                            
शायद उसकी रोशनी में छुपा है कोई इंतज़ार।
हवा भी आज कुछ खुशबू सी लगती है,
हर मोड़ पर जैसे उसकी ही तस्वीर दिखती है।
गली में आज चाँद निकला, तो रात भी आज मुस्कुराई है,
मेरे सूने दिल ने फिर से, कोई नई धुन गुनगुनाई है।
लोग कहते हैं चाँद तो आसमान में रहता है,
पर मेरा चाँद तो मेरी गली से आज ही होकर गुजरा है।गली में आज चाँद निकला, देखूँ मैं बार-बार.\
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एक महीने पहले

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