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अपनों का प्यार

                
                                                         
                            बड़ो का बड़पन और अपनों का प्यार,
                                                                 
                            
इस जग में सब को नसीब नहीं होता।
छोटे को डटना फिर उसकी माँग को पूरी करना,
ये हम सब के लिये अजीब नहीं होता।।
अपनों का साया जब सर से निकल जाता है,
उनकी किसी बात का हिसाब नहीं होता।
बुरी लगती है उनकी बाते, जब वो हमारे साथ होते है,
यूँही बिछड़ने के बाद माफ़ी का समय नहीं होता।
किस बात का गुमान है तुम्हें, जो दिल से लगाये बैठे हो,
अपनों की बात अलग है, गैरों को दुख नहीं होता
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एक घंटा पहले

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