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नारी पर कुछ मुक्तक

                
                                                         
                            नए विहान का आगाज है
                                                                 
                            
जीवन के संगीत का साज़ है 
यह वह पहलू है दुनिया का,
जिसपर सारी कायनात को नाज है 

कभी वह चांद सा मुखड़ा बन जाती है
कभी रोटी का टुकड़ा बन जाती है
उनके हौसलों की उड़ान की गवाह है दुनिया
कभी मिग , कभी चेतक, तो कभी,
राफेल की शान बन जाती है

आंसुओं से लिखी इबारत थी जो
बिना बुनियाद की इमारत थी जो
विकास के हर नक्शे पर वह आज छाई है
यह दौलत उसने शान से कमाई है
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3 वर्ष पहले

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