घिसती रही हर रोज़ मगर,
कभी शिकायत नहीं की।
दूसरों की तकदीर लिखती रही,
अपने हिस्से की बात नहीं की।
नोक टूटती रही राहों में,
फिर भी हौसला कम न हुआ।
जितना खुद को खोती गई,
उतना ही उसका काम बड़ा हुआ।
सीख यही है ज़िंदगी की,
कर्म से पहचान बनाओ।
घिसना पड़े अगर मंज़िल के लिए,
तो मुस्कुराकर आगे बढ़ जाओ।
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