जब ज़ुल्फ़ें बिखरें तेरी, तो हवाओं को पसीना आ जाए,
तुझे देख रात में चाँद भी शर्मा जाए।
तेरी शान में मैं परियों को भी नीचा दिखा दूँ,
लेकिन सोचता हूँ, कहीं उनके हुस्न का घमंड न टूट जाए।
-मोतिउर रहमान
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X