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तुम न हो पाए मेरी इन आँखों से ओझल

                
                                                         
                            तुम न हो पाए मेरी इन आँखों से ओझल
                                                                 
                            
तुम न हो पाए मेरी इन आँखों से ओझल
डूबे तो तेरे इश्क़ में थे
ये समंदर क्या ही डुबो पाएगा
तेरी आँखें ही काफ़ी थीं मुझे डुबोने के लिए
बस एक बार जी भरकर देख पाता
बस तुम न हो पाए मेरी इन आँखों से ओझल

प्रेम को कई तरह परिभाषित किया लोगों ने
पर मैंने तुमसे प्रेम कर जाना
इससे खूबसूरत एहसास कुछ नहीं संसार में
तुम्हारी आँखों में पूरा संसार दिखता है
तुम्हारी हँसी से सारा जग निखरता है
तुम्हारे चेहरे की चमक से
ये जहाँ चाँद जैसा चमकता है
बस तुम अगर मुस्कुराओ
तो ये संसार झन- झन हो जाए
बस तुम न हो पाए मेरी इन आँखों से ओझल

भगवान ने बनाया तो सभी को
बस निहारा है सिर्फ़ तुम्हें ही
मैं जो डूबा तुम्हारे इश्क़ में
तो ये संसार का मायाजाल भूल गया
मिल जाती अगर तुम मुझे
शायद तुम्हें पाकर मेरे प्राण निकल जाते
तुम्हें बसाया है मैंने अपने रग-रग में
मेरी हर साँस में तुम्हारा ही ध्यान है
मेरे प्राण बस तुममें ही बस गए
बस तुम न हो पाए मेरी इन आँखों से ओझल

कहते हैं हो जाती है दूसरी मोहब्बत
मानता हूँ इस बात को, पर
उसमें भी तुम्हें ढूँढना तो फिर कैसे दूसरी मोहब्बत..
तुम न हो पाए मेरी इन आँखों से ओझल

ढूँढती ये आँखें हर जगह तुम्हें
तस्वीरों में, पंछियों में, प्रकृति में
जहाँ सुंदर चीज़ें दिखें, वहाँ तुम नज़र आती हो
बस तुम न हो पाए इन आँखों से ओझल

 
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5 घंटे पहले

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