हर हाल में उसे पाना चाहता था
वो सुकून है बताना चाहता था...
गर वो आते वफ़ा की उम्र बढ़ जाती
शिद्दत से साथ निभाना चाहता था...
विस्तर में पड़ी ज़िंदगी कराहती रही
ज़िंदगी को मौत से बचाना चाहता था...
उस गली से गुजरुँ उसे देख लूँ ज़ी भर
ख़राब रास्ते पर भी जाना चाहता था...
बहुत बहे हैं अकेले में दर्द के आँसू
उनसे लिपटकर अश्क़ बहाना चाहता था...
यमुना नदी का पानी कुछ ठीक नहीं है
गंगा नदी में जाकर नहाना चाहता था...
~ दिलीप मिश्रा, खंडवा मध्यप्रदेश
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