बुलंदियों के शोर में, कोई तो अपना रूठा है
इत्तला कर दो खुदा को, अभी तो जज्बा मेरा रूठा है वक्त वक्त की बात है, वक्त की तो बात है
कभी ढाल थे तुम, आज खंजर थामे साथ हो तुम
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