मृत्यु अभिशाप है
मृत्यु अभिशाप है,
शत्रु अभिमान है।
कोशिशें भरपूर हैं,
मंज़िलें फिर भी दूर हैं।
ताकता तू चांद था,
धरती में गुमान था।
आज चकनाचूर हुआ,
तेरे नसीब का छाता, आज ज़मीन की धूल हुआ।
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