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रयन-ए-तन्हाई में

                
                                                         
                            रयन-ए-तन्हाई में जब तेरी ज़ुल्फ़ की याद निकलती है
                                                                 
                            
तिरा दीदार करने को अरमानों की ता'दाद निकलती है

वो ख़ुदा करे ता-उम्र तेरा चेहरा तबस्सुम-आमेज़ ही रहे
मेरी ख़ुदा के दर पर सिर्फ़ ये ही एक फ़रियाद निकलती है

ये निहायती मो'जिज़ा-नुमा है तिरे हुस्न पर सुख़न लिखना
मैं अर्जियाँ करता हूँ महफ़िल से निदा-ए-इरशाद निकलती है

मौजूदगी तेरी मिरी साँसों के लिए हवा की तरह है
मेरी जान भी निकलती है तो तिरे जाने के बाद निकलती है

जाम-ए-मदिरा-ए-कुहन है ग़म-ओ-अलम-ए-दुनियाँ का मु'आलजा
तेरी आँखों की मादकता इसका अपवाद निकलती है

हम जिसके पहलू से लग कर चलते हैं उसी का नफ़ा होता है
तिरी सोहबत के बिन लेकिन हर कोशिश बर्बाद निकलती है

दिल अक्सर ज़िम्मेदारियों के आगे मग़्लूब हो जाता है
हस्ती तहज़ीब-ओ-'इल्म-ओ-फ़न के बिन नाशाद निकलती है

इंशा-अल्लाह इलाही तेरे दामन में फ़रहत बख़्शें
तेरे जन्म-दिन पर मेरे दिल से मुबारकबाद निकलती है
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2 वर्ष पहले

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