मेघा,
तुमसे कभी मिल तो ना सकूँगी मैं
पर एक ज़रिया मिला है तुमसे बात करने का
कि तुमसे कह सकूँ वो सारे सच
मिलेगा बहुत वक़्त उन ज़ख़्मों को भरने का
तुम कभी तो हो एक सरफिरी सी उड़ती हुई तितली
जहां तुम्हे तो पत्तियां भी फूल नज़र आती हैं।
तुम्हारी हर मांग होती है बिना मांगे पूरी
जहां तु एक महीने तक अपना बर्थडे मनाती है
वो बड़े से बॉक्स में चमकते हुए खूब सारे तोहफे
तुम्हें दुआओं से महंगे नज़र आएंगे
रहेगी कोई ना कसर तुम्हारी परवरिश में
ना कोई सोच में आकर ज़हर मिलाएगा
ग्लास में है आज दूध
कल शायद शराब भी होगी
पर कोई सच का कड़वा घूूूंट तुम्हे ना पिलाएगा
अंजान हो तुम अभी अपनी खुश नसीबी से
जो तुम्हें एग्जाम्स के बुरे सपने आते हैं
उड़ेगी नींद जब मायूस आँखों से तुम्हारी
लगेगा कि अन-गिनत चीखों से भरी राते हैं
आने वाले दिनों में तुम्हें भी पहला प्यार होगा
तुम्हे लगेगा ये दिल बस उसी की अमानत है
ये हनीमून सा वहम टूटेगा जिस दिन
तब तुम समझोगी कि तुमको बस उसकी आदत है
और जिस दिन तुम्हे प्यार की ज़रूरत होगी
तब लाखों की भीड़ में भी खुद को अकेला पाओगी एक दिन
इन्ही सब बातों को लेकर उंगली उठाएगी दुनिया तुम पर
तुम अपनी आँखों से ही गिराओगी खुदको
खाई थी कसम मैंने सख्त इरादों की
कि इसी समाज में रह कर कुछ तो करना है
कुछ जिएंगे बस, बाकी सब को तो मरना है।
मेघा,
तुमसे कभी मिल तो ना सकूंगी
पर एक ये ज़रिया मिला है तुमसे आज बात करने का
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