बो मां जो कभी एक थी
टुकड़ों में बट गई
उलझी हुई रिश्तों में
उलझन में फस गई
अपना खून भी मजबूर हो गया
बो लाचार बेबस तो बेटा मौन हो गया
जब तुलता है प्रेम उसका तर्क वितर्क के तराजू में
कलेजा धक से होता है
हृदय आघात होता है
बस उसे आभास होता है
सभी रिश्ते खोखले फुफकार मारते हैं
कि सबब मिल गया अब देखते रहे
बस मौन हो जाये बस मौन हो जाये
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