चोट खाए हृदय से निकली है ये बात!
उम्र भर की दोस्ती की मिली अजब सौगात!!
जिन्हें हृदय ने दिया सदा अंतस में स्थान!
वहीं से मिला सबसे गहरा उपेक्षा का दान!!
अंतर्मन से चाहा जिनको वही फ़रेबी निकल गए!
क्षणिक चमक के मोह में जाने कैसे बदल गए!!
जीवन से सीखा इतना, पद का कभी न करना गुमान!
"मीना" वहाँ न जाना कभी.. मिले न जहां सम्मान!!
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