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अनकहे शब्द

                
                                                         
                            जो लब पर आ नहीं पाते वो आंसू ख़ास होते हैं
                                                                 
                            
कुछ अनकहे शब्द दिल के आस पास होते हैं

समझ पाता नहीं कोई आँखों की वीरानी को
जो हंसते हैं खूब ज़माने में वो अक्सर उदास होते हैं

मोहब्बत में गुफ़्तगू की शर्त मत रखना यारा ...
जहाँ ख़ामोशियाँ बोलें वहीं एहसास होते हैं

तलाशती हैं निगाहें आज भी उस दौर को "मीना"
कि गुज़रे दौर के लम्हे बड़े ही खास होते हैं..
- मीना गोपाल त्रिपाठी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
53 मिनट पहले

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