टटोल कर देखें जरा ज़िंदगी के थैले में कुछ तो समाया होगा
क्या पता कोई भूला सा तमगा हमने भी कमाया होगा
रोज़ लगता है बड़ी बेवजह सी गुज़ार दी ज़िंदगी यूँ ही
देखें ही लें क्या पता किसी लम्हे ने शायद कोई दिलासा छुपाया होगा
पूरा फिर भी नहीं ढूँढेंगे इस थैले को
जरा सी उम्मीद कभी और कुछ ढूँढ लेने की छोड़ देना ही बेहतर होगा
वरना ख़ाली उलट दिया जो इसको भी तो तुम ही बताओ आगे गुज़ारा कैसे होगा
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