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सुनो सत्ता

                
                                                         
                            सुनो सत्ता क्या तुमने कभी सब्र टूटते नहीं देखा है
                                                                 
                            
समंदर को मत चिढ़ाओ पत्थर फेंक फेंक क्या तुमने कभी सैलाब आते नहीं देखा है
जल रहा है सब कुछ यहाँ आँच को ना इतना बढ़ाओ क्या तुमने उबलता उफान नहीं देखा है
बस खिंच गया है तार बहुत अब छोड़ दो .. क्या मुमकिन है तुमने कभी सब्र टूटते नहीं देखा है
बहुत दबा लिया आम से लोगों को अब रुक भी जाओ..
क्या दबे से बीज को कभी मिट्टी से लड़ते नहीं देखा है
नहीं देखा तो जान जाओ सहनशीलता एक रेखा है
इस पार तुम और तुम्हारी सत्ता है और उस पर खौलता जन सैलाब रहता है
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3 महीने पहले

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