मुमकिन तो नहीं पर चलो तुम ही बतला दो
कोई जो कहे मुश्किलातें से मिलना हुआ नहीं कोई ऐसा दिखला दो
कश्ती निकल जाती है तूफ़ान से बस कोई उसे साहिल भर दिखला दो
हम भी संभाल ही जायेंगे कोई ज़िंदगी को आस देने का हुनर सिखला दो
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