क्यों रोज़ को रोज़ बदलने का मंसूबा करें
ज़ो आज है वो सुधार बेशक जाये पर सूरते हाल क्या इतना ख़राब है
की रोज़ उसे कोसा करें
जिन्हें अपना आज इस क़दर ना मंज़ूर है
पूछो इनसे ज़िंदगी कल होगी और कमाल होगी ये कैसे इत्मीनान करें
बदलो बेशक पूरी शिद्दत से आपने आज को
पर जरा मुस्कुराओ यार जो ना रहें कल तो ना हँसे ना ये मलाल रहे
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