चुप से तुम थे आज भी सुबह
हम भी चुप थे बस इसी तरह
सोचा दिन भर कोई बात निकल ही आएगी
देखो शाम भी होने चली अब रात भी ऐज़ जाएगी
बंद कर दें इस खिड़कियों को वरना रिश्ते पर धूल सी चढ़ जाएगी
खाने पर कुछ शिकवे पड़ोस लाना यूँ ही कुछ बात तो हो जाएगी
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