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पिनज़रा भा गया?

                
                                                         
                            वो था उड़ने को,
                                                                 
                            
मैंने उसे कैद कर लिया।
उसे पिंजरा न भाया,
फिर भी मैंने उसे कैद कर लिया।
और जो आई उसे उड़ाने,
उसने कैद कर लिया
खुदको उसी में दफ़न कर लिया
शायद ,
अब उसे ये पिंजरा भा गया हैं।
अब ना वो उड़ने की बात करता है,
ना आसमान को देखता है।
अब वो खामोश रहता है,
जैसे सोर करना भूल गया हो।
पंख तो अब भी हैं उसके
मगर जैसे उड़ना भूल गया हो।
मैंने उसकी खामोशी को
भी अपने नाम कर लिया।
पहले वो पिंजरे से लड़ता था,
अब खुद को समझा लेता है।
शायद,
शायद जैसे उसे ये पिंजरा भा गया हो।
वैसेटूट कर तो इसान भी
कैद से मोहब्बत कर ही लेता है।
 
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3 महीने पहले

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