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ये तन्हाई मेरे जीवन का एक हिस्सा..

                
                                                         
                            ये तन्हाई मेरे जीवन का एक हिस्सा हो गई,
                                                                 
                            
आज य़ह मेरे जीने का ही किस्सा हो गई।।

जिन्हें अपना समझकर उम्र भर आवाज़ दी,
वो गए ऐसे कि हर आह भी, चुप सा हो गई।।

घर भरा था, लोग थे, रिश्तों की हलचल भी रही,
फिर न जाने क्यों ये रूह भीतर से सूना हो गई।।

कुछ पुराने ख़्वाब थे जो आँख में ठहरे हुए,
वक्त की बारिश पड़ी,हर तस्वीर धुँधला हो गई।।

अब शिकायत भी नहीं है, ना किसी से गिला,
दर्द की हर एक लकीर मेरी भाषा हो गई।।

मैंने सीखा है अँधेरों में भी जलते रहना ,
ज़िंदगी ठोकर नहीं, जीने का ज़रिया हो गई।।

वो लौट के आए या न आए ये डर रहता नहीं,
मेरी तन्हाई ही मेरी सबसे अच्छी संगिनी हो गई।।

फिर भी दिल के किसी कोने में उजाला है अभी,
शायद इक दिन ये तन्हाई भी नई सुबह हो गई।।
- एम के सिंह
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3 महीने पहले

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