आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

वो बचपन का प्यार आज भी याद आता है

                
                                                         
                            वो बचपन का प्यार आज भी याद आता है,
                                                                 
                            
हर एक ख़्वाब आँखों में फिर मुस्कुराता है।।

न दौलत की तमन्ना, न शोहरत का था सपना,
वो छोटा-सा जहाँ दिल को बहुत ही भाता है।।

कभी धूप में हँसते,कभी बारिशों में हम भीगते,
आज वही हर एक मंज़र रूह को सहलाता है।।

वो काग़ज़ की कश्ती, वो बनाते मिट्टी के घरौंदे,
ज़माना छीन ले फिर भी,कहां कभी भूल पाता है।।

वो मासूम-सी नज़रें,वो बिन बोले ही हुयी मोहब्बत,
हर एक ज़िक्र दिल में,आज भी उजाला जगाता है।।

मिले भी तो अजनबी- सी ये ख़ामोशियाँ मिलीं,
समय हर एक रिश्ते को कितना बदल जाता है।।

न शिकवा है मुक़द्दर से, न कोई गिला हमको,
जो अपना था वही दिल में सदा घर बनाता है।।

कवि 'एम के सिंह' लिखो आज वही पहली कहानी,
बचपन का प्यार ही उम्र भर साथ निभाता है।।

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर