तेरी बेवफ़ाई ने मुझे आईना बना दिया,
हर टूटते हुए ख़्वाब का फ़साना बना दिया।।
जिस राह पर वफ़ाओं के दीपक जलाए थे,
तूने उसी सफ़र को वीराना बना दिया ।।
हमने तो उम्र भर तेरा एहतराम ही किया,
तूने हमें ही अपने लिए बेगाना बना दिया।।
तू हँस रहा है आज नई महफ़िलों के बीच,
हमने ग़मों को अपना ठिकाना बना दिया।।
शिकवा नहीं है तुझसे , यही इश्क़ का उसूल,
पत्थर मिले तो दिल ने ख़ज़ाना बना दिया।।
अब भी दुआ है तेरे सभी ख़्वाब सच रहें,
रंजिश को भी वफ़ा का तराना बना दिया।।
कवि 'एमके. सिंह' इतना ही हासिल है इश्क़ से,
जिस दर्द ने रुलाया, वही शायर बना दिया।।
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