तेरी आँखों में जो देखा मैंने, वही संसार हो गया,
तेरा मिलना ही मेरी रूह का त्योहार हो गया।।
तेरे लब की हँसी से ही खिल उठीं वीरानियाँ मेरी,
हर अधूरा ख़्वाब मेरा, आज साकार हो गया।।
जब भी थामा तूने मेरा हाथ सच्ची चाहत से,
मेरा हर कठिन लम्हा भी ख़ुशनुमा सफ़र हो गया।।
तेरी ख़ामोशियों ने भी मोहब्बत लिख दी दिल पर,
हर धड़कन का फ़साना इश्क़ का इकरार हो गया।।
तेरे संग छाँव भी है, धूप भी है, हर खुशी भी,
तेरा होना ही तो मेरे जीने का आधार हो गया।।
कभी नज़र न लगे इस प्यार की पाक दौलत को,
ये रिश्ता तो ख़ुदा का सबसे सुंदर उपहार हो गया।।
चलें यूँ ही उम्र भर वफ़ा की राहों पर हम साथ-साथ,
हर जनम का जैसे तुझसे ही फिर करार हो गया।।
कवि एमके सिंह' यही दुआ है रब से हर एक साँस में,
पति - पत्नी का सच्चा इश्क़ ही मेरा श्रृंगार हो गया।।
- एम के सिंह
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