तेरे जाने का वही ख़ुमार आज भी है,
मेरी रूहों में तेरा इंतज़ार आज भी है।।
उम्र गुज़री है कई मौसम बदलते- बदलते,
दिल के आँगन में मगर, बहार आज भी है।।
तू भले भूल गया नाम मेरा दुनिया में,
मेरी धड़कन पे तेरा अधिकार, आज भी है।।
मैंने हर दर्द को अश्कों में पिरोकर देखा,
लब पे वफ़ा का वही इज़हार आज भी है।।
रात चुपके से तेरी याद जगाने आती ,
मेरे तकिए पे तेरा प्यार आज भी है।।
हज़ार लोग मिले , लाख मुसाफ़िर आए,
दिल को बस तेरा ही ऐतबार आज भी है।।
मैं दुआ करता हूँ कि तू चाँद-सा रोशन रहे,
मेरी हर साँस में तेरा सत्कार आज भी है।।
'एमके सिंह आज' ये ग़ज़ल गवाही देती है,
मेरी शायरी में तेरा इंतज़ार आज भी है।।
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