मोहब्बत का नशा जब रूह पर उतर जाता है,
हर एक ज़ख़्म भी फिर फूल-सा नज़र आता है।।
तेरी यादों की महक दिल में यूँ ठहर जाती है,
ज्यों चाँदनी का सफ़र रात भर बिखर जाता है।।
नज़र से जो पिलाया था तूने इश्क़ का जाम कभी,
वो मय नहीं कि सुबह होते ही उतर जाता है।।
हज़ारों लोग मिले हैं राह में मुसाफ़िर बनकर ,
मगर तेरा ही चेहरा दिल में घर कर जाता है।।
वफ़ाओं की किताबों में तेरा ही नाम लिखा,
हर एक झूठ यहाँ वक़्त के साथ मर जाता है।।
न दौलत , न शोहरत , न कोई तख़्त चाहिए ,
तेरा एक साथ ही तक़दीर सँवर जाता है ।।
कभी इश्क़ को कमज़ोर समझने की ख़ता न करना,
यही दरिया तो पत्थरों से भी गुज़र जाता है ।।
'एमके सिंह' मोहब्बत का नशा किस्मत से मिलता है,
जिसे हो जाए, वो हर दर्द पर भी मुस्कराता है।।
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