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मासूमियत को कभी कमजोरी..

                
                                                         
                            मासूम चेहरों में ख़ुदा की झलक मिल जाती है,
                                                                 
                            
सूनी राहों को भी जैसे चमक मिल जाती है। ।

जिस दिल में छल–कपट का कोई नाम नहीं,
उसकी बातों में अलग सी महक मिल जाती है।।

नफ़रत के मौसम कितने भी लंबे क्यों न हों,
प्यार की बारिश से हर इक दमक मिल जाती है।।

जो किसीय के दर्द को चुपचाप समझ लेता है,
उस इंसाँ को दुआओँ की फलक मिल जाती है।।

मासूमियतय को कभी कमज़ोरी मत समझो,
इसी से जीवन को सच्ची चमक मिल जाती है।।

दुनिया चाहे लाख बदल ले क्यों नहीं अपने चेहरे,
सादगी वालों को हर दिल में जगह मिल जाती है।।

अपने हर रिश्तों को जो प्यार से सींचे उम्र भर,
उसके हिस्से में ही खुशियों की फसल मिल जाती है।।

कभी चेहरे से नहीं, दिल से ही पहचानो लोगों को,
मासूम नज़रों में ही असली झलक मिल जाती है।।
- एम के सिंह
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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