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लोग पढ़ते हैं मेरे चेहरे की खामोश लकीरें

                
                                                         
                            आज भी तेरी मोहब्बत को दिल में बसा रखा है,
                                                                 
                            
इश्क़ की लौ को मैंने हवाओं में जला रखा है।।

तू नहीं है मेरे पास तो भी एहसास तेरे साथ चले,
मैंने अपने हर साँस में तेरा ही पता रखा है।।

वक़्त ने लाख मेरी चाहत को मिटाना चाहा,
अपने हर अश्क में मैंने तेरा ही नशा रखा है।।

लोग पढ़ते हैं मेरे चेहरे की ख़ामोश लकीरें ,
मैंने अपने हर दर्द को मुस्कान बना रखा है।।

तेरे वादों की महक अब भी फ़िज़ाओं में है,
मैंने यादों का गुलिस्ताँ यूँ ही सजा रखा है।।

कोई समझे न समझे ये मेरे दिल की ज़ुबाँ,
तेरे नाम का ही हर ख़्वाब लिखा रखा है।।

जिस गली से कभी तेरे क़दमों की सदा आई थी,
आज उस गली को भी दुआओँ में बसा रखा है।।

तू अगर लौट के आई तो ये महसूस करेगी ,
मैंने हर मोड़ पे अब तक विश्वास खड़ा रखा है।।

'एमके सिंह' इश्क़ की रीत बदलती ही नहीं सदियों
से, आज भी दिल ने उसी नाम को ख़ुदा रखा है।।

 
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2 महीने पहले

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