बड़ी मुद्दत के बाद आज ये एहसास हुआ,
सुकून दिल में था, बस दिल ही उदास हुआ।।
हवाओं ने तो कई बार रास्ते बदल डाले,
वफ़ा का एक चराग़ ही मेरा लिबास हुआ।।
महल भी देख लिए , ताज भी नसीब हुए,
मगर जो माँ की दुआ मिली, वही ख़ास हुआ।।
जो अपने दर्द को हँसकर छुपा गया है सबसे ,
वही ज़माने की नज़रों में ख़ुशनिवास हुआ।।
न दौड़ जीतने की थी, न हार का ग़म था,
जो ख़ुद से मिल गया, वही बेमिसाल हुआ।।
नफ़रतों की आग ने कितने घर जला डाले,
मोहब्बतों का दिया ही सदा उजास हुआ।।
जो सच के साथ रहा, आँधियों से क्या डरता,
उसी के नाम का हर दौर में प्रकाश हुआ।।
'कवि एमके सिंह' ने यही सीखा है उम्र भर,
जो बाँटता रहा सुकून, वही ख़ुद ख़ास हुआ।।
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