दिल में अब भी मोहब्बत की आरज़ू बाकी है,
सूखे मौसम में भी भीगी सी ख़ुशबू बाकी है।।
वक़्त ने लाख मिटाने की कोशिशें की हों,
तेरे एहसास की आँखों में, जुस्तजू बाकी है।।
रास्ते बदल गए , लोग भी सदा बदलते रहे,
दिल के किसी कोने में, वही रूबरू बाकी है।।
ना कोई शिकवा रखा, ना कोई इल्ज़ाम दिया,
फिर भी मिलने की कहीं एक आरज़ू बाकी है।।
चाँद फीका लगे, तारे भी कम नज़र आएँ,
तेरी यादों की मगर अपनी आबरू बाकी है।।
हमने सीखा है मोहब्बत में सब्र का हुनर,
हार के बाद भी जीने की आरज़ू बाकी है।।
मिल न पाएँ तो भी रिश्तों का मान रहे,
दिल में बस एक दुआ और आरज़ू बाकी है।।
- एम के सिंह
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