कभी आँखों से,कभी ख़ामोशियों से बात होती है,
मोहब्बत जब मुकम्मल हो,तो यूँ शुरुआत होती है।।
छुपाकर दर्द सीने में जो हर पल मुस्कुराता है,
उसी इंसान के हिस्से बड़ी सौग़ात होती है ।।
न दौलत,न ही शोहरत आदमी की शान होती है,
ज़माने में तो बस उसके बड़े जज़्बात होती है।।
यहाँ चेहरे बदलते हैं मौसम की तरह अक्सर,
मगर किरदार से ही हर किसी की जात होती है।।
जो सच के साथ चलता है, वही तनहा भी रहता है,
मगर उसके क़दम पर ही ख़ुदा की नज़रात होती है।।
हमारे ज़ख़्म ही हमको आज हुनरमंद बना बैठे,
जहाँ ठोकर मिली ही , वहीं से नई उड़ान होती है।।
'एमके सिंह' झुकाकर सिर जीना हमें मंज़ूर कब था,
हमारी शायरी तो बस ज़मीर की आवाज़ होती है।।
- एम के सिंह
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