तेरी मोहब्बत में हम ख़ुद को भुलाते ही रहे,
हर दर्द को हँसकर दिल में छुपाते ही रहे।।
तेरी हँसी से ही रोशन था मेरे दिल का जहाँ,
तेरे ही ख़्वाबों के दीपक को जलाते ही रहे।।
तू साथ था तो हर इक राह गुलिस्ताँ सी लगी,
तेरे बिन मैं तो वीरानियों को ही सजाते रहे।।
तूने न सुनी दिल की सदा, ये तेरा फ़ैसला था,
हम फिर भी वफ़ाओं के नग़मे सुनाते ही रहे।।
जीवन के हर मोड़ पर उम्मीद ने दामन नहीं छोड़ा,
तेरे लौट के आने की हम दुआएँ उठाते ही रहे।।
ना ताज की ख़्वाहिश, न किसी दौलत का नशा,
बस तेरी चाहत को ही हम ख़ज़ाना बताते ही रहे।।
"एमके सिंह" तेरी मोहब्बत ने ये हुनर दे दिया,
हम दर्द में भी सदा यूँ ही मुस्कुराते ही रहे।।
-एम के सिंह
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