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एक ख्वाब पलता रह गया

                
                                                         
                            रात की चादर में फिर एक ख़्वाब पलता रह गया,
                                                                 
                            
दिल की वीरान बस्तियों में चाँद जलता रह गया।।

तेरी आहट की सदा को उम्र भर सुनते रहे ,
दर खुला था ,पर मुक़द्दर ही बदलता रह गया ।।

रेत पर लिखी हर तमन्ना लहर ने मिटा तो दी ,
एक नाम आँख की नमी में फिर भी ढलता रह गया।

धूप ने हर मोड़ पर रिश्तों की परख ले ही ली,
सच का पौधा आँधियों में भी सँभलता रह गया।।

कुछ सितारे छिन गए तो आस टूटी भी नहीं ,
एक दीपक हौसलों का रात भर जलता रह गया।।

ख़्वाब जब सच की ज़मीं पर पाँव रखने आ गया,
झूठ का हर आईना खुद-ब-खुद पिघलता रह गया।।

'एम. के. सिंह' ये सीख दिल ने उम्र भर दुनिया से ली,
जो वफ़ा के साथ निकला, वो ही चलता रह गया।।

 
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2 महीने पहले

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