दिलों में प्यार का दीपक जलाने वाले दोस्त,
हर एक दर्द को हँसकर मिटाने वाले दोस्त।।
न पूछते हैं कभी जात, धर्म या दौलत,
इंसानियत का सबक़ ही पढ़ाने वाले दोस्त।।
गिरा जो राह में कोई , उसे उठाकर फिर,
उम्मीद बनके गले से लगाने वाले दोस्त।।
नफ़रतों के इस धुएँ में भी मुस्कुराते हैं,
वफ़ा की ख़ुशबुएँ हर सू लुटाने वाले दोस्त।।
सफ़र में धूप अगर हो तो छाँव बन जाएँ,
थके हुए दिलों को गुनगुनाने वाले दोस्त।।
ख़ुद अपने हिस्से की खुशियाँ भी बाँट देते हैं ,
ग़मों के बोझ को मिलकर उठाने वाले दोस्त।।
दुआ है उम्र भर रिश्तों में ये महक कायम,
जहाँ रहें, वहीं जन्नत बसाने वाले हो दोस्त।।
'एमके सिंह' आज यही दिल से दुआ निकली,
सलाम उन सभी यारों को—निभाने वाले दोस्त।।
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