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दौलत ने खऱीद ली रिश्तों की..

                
                                                         
                            महरूम हूँ मैं आज भी तेरी वफ़ाओं से,
                                                                 
                            
लेकिन नहीं झुका कभी झूठी अदाओं से।।

तक़दीर ने छीन ली होंठों की हर हँसी,
रिश्ता मगर नहीं टूटा मेरी दुआओँ से।।

पत्थर भी पिघल गए मेरी सच्ची पुकार पर,
तू ही न पिघल सका मेरी इल्तिज़ाओं से।।

हर ज़ख़्म मुस्कुराकर ज़माने से छुपा लिया,
हम हार कब गए किसी दर्द की बलाओं से।।

दौलत ने ख़रीद ली रिश्तों की हर चमक,
इंसान दूर हो गया अपने ख़ुदाओं से ।।

मैंने तो अपनी रूह भी उसके नाम कर दी,
वो फिर भी दूर ही रहा मेरी सदाओं से।।

अब किससे पूछिए कि वफ़ा का पता कहाँ,
चेहरे बदल गए हैं सभी आशनाओं से ।।

सच बोलने की सज़ा मुझे हर मोड़ पर मिली,
फिर भी नहींय डरा कभी झूठी ख़िताबों से।।

'एमके सिंह'लिख रहा हूँ दर्द की तहरीर आज भी,
शायद कोई तो दिल मिले इन गूँगी फ़िज़ाओं से।।

 
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2 महीने पहले

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