बेटी बचाने की बातें तो
हम सब मिलकर करते हैं,
पर बेटों के मन का दुख
कभी कहाँ हम पढ़ते हैं।।
बेटी घर की प्यारी होती है ,
बेटा भी तो अपना ही है,
दोनों से ही जीवन सजता,
दोनों ही अपना सपना है।।
बेटे भी कुछ दर्द छुपाकर
हँसते रहते हैं चुपचाप ,
दिल में कितनी बातें होतीं,
कह न पाते अपने आप।।
क्यों न ऐसा समय बनाएँ
जहाँ मिले सबको सम्मान,
न बेटी रहे कम,न बेटा कम,
दोनों हैं घर की पहचान।।
सच्चा संदेश यही रहेगा
पहुंचे हर घर तक यह बात
बेटी हो या बेटा अपना,
दोनों हैं अनमोल सौगात।।
- एम के सिंह
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X