तुम मेरे दिल में रहती हो पहले की तरह आज भी,
सूनी सी हर ख़ुशी में महकती तुम हो आज भी।।
अब तो लाखों बदल गए हैं ज़माने के रंग मगर ,
वफादारी भरी वफ़ा के रंग में रंगती हो आज भी।।
मैंने तो अपने हर दर्द को हँसकर के छुपा लिया,
तन्हाई में मेरी नमी बनी हुई लगती हो आज भी।।
तक़दीर ने हम दोनों को मिलन की इजाज़त नहीं दी थी,
क़िस्मत से लड़ने की वजह तुम बनती हो आज भी।।
जब चाँद रात भर मेरी खिड़की पे आकर ठहरता है,
चांद के सफ़ेद रोशनी में तुम मुझे दिखती हो आज भी।।
अक्सरहाँ महफ़िल में लोग पूछते हैं मुस्कुरा के मुझसे,
किस सोच में डूबे हो, तुम मिलती हो मुझे आज भी।।
मेरे दिल ने तो कई दफ़ा ये इरादा ही बदल दिया ,
मेरे तन्हाई में यादों के दर पे आके सँवरती हो आज भी।।
हम दोनों का रिश्ता नहीं रहा तो क्या,एहसास तो वही है,
मेरी दुआओं के साथ ही तुम चलती हो आज भी।।
कवि एमके सिंह' लिखते हैं जब भी मोहब्बत के अशआर,
हर मिसरे की रूह में तो तुम बसती हो आज भी।।
-एम के सिंह
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