इश्क और बारिश के जो अफसाने हैं,
जो मन से भीगे, सिर्फ वो ही जाने हैं!
बूंदें पावस की गालों से टकरा टकराकर,
दिल की इकतारे में छेड़ते मीठे तराने हैं !
सर-सर हवाओं की छूए जब कानों को
धड़कन की हर"धक"में नाचते दीवानें हैं!
रिमझिम सावन की टिप-टिप -टिप -टिप में,
प्रियतमा की पांवों के घुंघरुओं के खजाने हैं!
बादल जब गरजे दो दिल एक हो गए,
नज़रों से मिल जाते, खूबसूरत नजराने हैं!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X