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दिल से ढुंढोगे

                
                                                         
                            दिल से ढूंढोगे, इंसान भी मिल जाएगा,
                                                                 
                            
जाने किस रूप में, भगवान भी मिल जाएगा।

फूलों की सेज पर जब नींद नहीं आएगी,
साथी मजदूर और किसान भी मिल जाएगा।

कौन कहता है कि सूरज से बदन जलता है,
मखमली किरणों का वरदान भी मिल जाएगा।

जरा सा अहम को हम दिल से ही निकाल दें,
दर- ए- दिल ढूंढता मेहमान भी मिल जाएगा।

तन मन सब कुछ जब "कृष्ण" पर निवारेंगे
गीता का कर्म योग ज्ञान भी मिल जाएगा।

बुलंद करते रहें हम,वक्त की आवाज को,
वक्त के हांथों से सम्मान भी मिल जाएगा।
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एक दिन पहले

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