आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बुलबुल की गीत सुनने

                
                                                         
                            फूलों सा उसका हंसना
                                                                 
                            
कलियों सा मुस्कराना
कुदरत की खूबसूरत
ले आयी है नजराना।

झरनों से मीठी मीठी
लगती है उसकी बोली
दिखती है बड़ी प्यारी
गुस्से में तमतमाना।

आंखों में झिलमिलाती
है स्वर्ण किरण आभा
चंदा की मखमली सा
स्पर्श है खजाना।

आंगन में गूंजती है
इक गूंज मौसिकी का
तन मन को है नचवाती
घुंघरू का छनछनाना।

हमारी " अग्निवर्णा" है
घर की जीवन रेखा
बुलबुल की गीत सुनने
मेरे घर चले आना।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
48 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर